महबुलिया के गीत...
पितरों के सम्मान हित, चली अनूठी रीत।
घर-घर गातीं बच्चियाँ, महबुलिया के गीत।
काँटों वाली शाख में, टाँकें चुन-चुन फूल।
दुहराएँ फिर से चलो, सुखद पुरातन रीत।
© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद
पितरों के सम्मान हित, चली अनूठी रीत।
घर-घर गातीं बच्चियाँ, महबुलिया के गीत।
काँटों वाली शाख में, टाँकें चुन-चुन फूल।
दुहराएँ फिर से चलो, सुखद पुरातन रीत।
© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद