पैग़ाम मेरे इश्क का कोई तो पढ़ गया,
पैग़ाम मेरे इश्क का कोई तो पढ़ गया,
कफ़स मेरे एहसास का जाने कैसे तोड़ गया।
जो क़ैद बन के जिंदा था मेरी रूह में,
कोई ऐसे समाया मुझमें कि रूह को हवा बना उड़ा ले गया।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
पैग़ाम मेरे इश्क का कोई तो पढ़ गया,
कफ़स मेरे एहसास का जाने कैसे तोड़ गया।
जो क़ैद बन के जिंदा था मेरी रूह में,
कोई ऐसे समाया मुझमें कि रूह को हवा बना उड़ा ले गया।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”