Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
8 Sep 2025 · 1 min read

जल संरक्षण-बाल गीत

जल है जीवन जल है धन,
इससे खिलता है तन-मन।
बूँद-बूँद में अमृत छलके,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।

बंद करो यदि खुला है नल,
व्यर्थ न होने पाए जल।
उतना ही उपभोग करो,
जिससे हों सब काम सफल।
अमृत है हर बूँद नीर की,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।

ताल तलैया नदिया नाले,
इन सबसे है धरा मगन।
संरक्षित कर रखना इनको,
सुखी रहेगा जन जीवन।
ये धरती का अनुपम गहना,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।

पेड़ लगाओ बरसें घन,
पानी बिन सूना जीवन।
बूँद-बूँद को संचित करना,
प्यासा रहे न कोई जन।
जल से ही जीवन धरती पर,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।

#स्वरचित व मौलिक रचना
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’

Loading...