जल संरक्षण-बाल गीत
जल है जीवन जल है धन,
इससे खिलता है तन-मन।
बूँद-बूँद में अमृत छलके,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।
बंद करो यदि खुला है नल,
व्यर्थ न होने पाए जल।
उतना ही उपभोग करो,
जिससे हों सब काम सफल।
अमृत है हर बूँद नीर की,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।
ताल तलैया नदिया नाले,
इन सबसे है धरा मगन।
संरक्षित कर रखना इनको,
सुखी रहेगा जन जीवन।
ये धरती का अनुपम गहना,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।
पेड़ लगाओ बरसें घन,
पानी बिन सूना जीवन।
बूँद-बूँद को संचित करना,
प्यासा रहे न कोई जन।
जल से ही जीवन धरती पर,
इसे बचायें क्षण-प्रतिक्षण।।
#स्वरचित व मौलिक रचना
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’