यूँ तो जमीं पर......
यूँ तो जमीं पर रेत हैँ
दरख्त आसमां इतराता
ज़मी पर तो आसमां भी
उतर आता है आजकल
फकत ज़मीन इतराती नहीं
सोच क्या होता जमीं ना होती
तेरी बारिश तेरी बिजली
तेरी तड़प तेरी तबाही
तू कहाँ बिछाता
एक बार देख जमीं को
सब निगल जाती हैँ
अपने अंदर
और ज़मीन मे तेरा पानी
कभी सरिता कभी सागर
कभी जलप्रपातो मे डल जाता हैँ
शुक्रगुजार होजा अब तो तू भी
तू तो उसकी माटी भी बहा ले जाता हैँ
दीपिका सराठे