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7 Sep 2025 · 1 min read

भरोसे कि आस

भरोसे की आस जो करते
किराना छोड़ जाते है
उन्हें कश्ती नही मिलती
जो कर्म छोड़ देते है

भरोसे की आस जो करते
वो संतुष्टि नहीं पाते
उन्हें लगता है रिश्तो मे
बयारे हो नहीं सकती

भरोसे की आस जो करते
वो गुलजार तड़पता है
उसे ना धैर्य होता है
ना वो एतबार करता है

भरोसे की आस जो करते
न वो तदबीर पाते है
उन्हें लगता आसरो मे
कोई तक़दीर पलती है

दीपिका सराठे

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