भरोसे कि आस
भरोसे की आस जो करते
किराना छोड़ जाते है
उन्हें कश्ती नही मिलती
जो कर्म छोड़ देते है
भरोसे की आस जो करते
वो संतुष्टि नहीं पाते
उन्हें लगता है रिश्तो मे
बयारे हो नहीं सकती
भरोसे की आस जो करते
वो गुलजार तड़पता है
उसे ना धैर्य होता है
ना वो एतबार करता है
भरोसे की आस जो करते
न वो तदबीर पाते है
उन्हें लगता आसरो मे
कोई तक़दीर पलती है
दीपिका सराठे