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7 Sep 2025 · 1 min read

अश्क़.......

अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
कि अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
जब नयन मे भरे तो वो झील लगे
जब पलक पर गिरे तो फुवारे लगे
कब वो निरझर बना यें पता ही नही

अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
कि अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
जाब वो स्पर्श, गालो क़ो करता गया
यूँ तो मोती लगा वो गिरते हुए
कब सरिता बना यें पता ही नहीं

अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
कि अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
अश्रु कब यें मधुर से खारे हुए
यू तो रदपट पे गिरकर यें मालूम हुआ
कब सरिता यें बनकर समुन्दर हुआ

अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
कि अश्क़ बहते हुए यें ख्याल आ गया
अश्रु बनकर जो यूँ तू भी गायब हुआ
यें भी सुखी यें बंजर जमीं बन गई है
अब ना मोती बचे ना यें सागर रहा

दीपिका सराठे

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