मर्जी के हैं धर्म अब,
मर्जी के हैं धर्म अब,
मर्जी के हैं कर्म ।
क्या बोलें अब आँख में,
मर्जी की है शर्म ।।
सुशील सरना / 7-9-25
मर्जी के हैं धर्म अब,
मर्जी के हैं कर्म ।
क्या बोलें अब आँख में,
मर्जी की है शर्म ।।
सुशील सरना / 7-9-25