बादल
आ भी जाओ बहार बन कर
बादल आसमां में
बरस भी जाओ बादल प्यारे
सूखी धरती तुझे पुकारे।
हर तरफ सूखा पड़ा है
आसमां रूठा पड़ा है – 2
आ भी जाओ बादल बनकर
सब कुछ अब तेरे सहारे
बरस भी जाओ बादल प्यारे
सूखी धरती तुझे पुकारे।
थोड़ा सा मर्म तो समझा है
बादल भी हम पर बरसा है
हर तरफ छाई हरियाली
खुशियों से भरे हैं सब के चेहरे
बरस भी जाओ बादल प्यारे
सूखी धरती तुझे पुकारे।
इतना भी नहीं चाहा था बरसो
हर कहीं पानी पानी करदो
सबकुछ बह गया रह गया पानी
हर आवाज मदद को पुकारे
बरस भी जाओ बादल प्यारे
सूखी धरती तुझे पुकारे।
@ विक्रम सिंह