सब सरकार की कृपा..
व्यंग्य
जी! सब सरकार की कृपा..
सरकार किसी की भी हो। सरकार होती है। जो सर पर कार चलाए, वो सरकार। जो सर सर करे वो सरकार। जो सर सराती निकल जाए वो सरकार। जो सरकती चले वो सरकार। जो बन जाए वो सरकार। जो न बन सके, वो सरकार। गली मुहल्ले की सरकार। गांव की सरकार। शहर की सरकार। दिल की सरकार। सूबे की सरकार। मशीनरी की सरकार। नेताओं की सरकार। अफसरों की सरकार। घर की सरकार। बाहर की सरकार। मनमर्जी की सरकार। इसकी सरकार। उसकी सरकार।
सरकार शब्द पूर्ण ब्रह्म है। इसके न कोई आगे है और न पीछे। काम हो तो हमने किया। नहीं हो तो उसने होने नहीं दिया।
जनता सरकार को भगवान मानती है। उसी पर डिपेंड रहती है। भगवान सबकी सुनता है। बोलता नहीं। सरकार भी यही करती है। वह बोलती नहीं, करती है। किसी व्यक्ति का महज बोलना सरकार नहीं है। जैसे संत की वाणी ईश्वर वाणी नहीं है।
सरकार सब कुछ कर सकती है। वह आकाश पाताल एक करती है। जैसे त्रिदेव। वैसे सरकार भी त्रिदेव ही है। कार्यकर्ता सोचता है, मैं ही सरकार हूं। पार्टी अध्यक्ष अपने को सरकार मानता है। सांसद/विधायक/मंत्री अपने को सरकार मानते हैं। इससे ऊपर के लोग गीता का ज्ञान देते हैं…न तुम सरकार हो..न वो सरकार हैं। हम सरकार हैं। सारा जगत हम से है। हम जो निर्देश देते हैं। तुम उनका पालन करते हो। कार्यकर्ता से ही पार्टी है। पार्टी से ही सरकार। सरकार से ही जनतंत्र है। जाओ, जागरूकता अभियान छेड़ो। ( जैसे पब्लिक मूर्ख है। इनसे पहले सोकर उठती है। इनके बाद सोती है)।
जन+तंत्र अलग अलग है। राजनीति अलग। तुम राजनीति में हो। नेता हो। कार्यकर्ता हो। यह सड़क पर दिखना चाहिए। हूटर बजाओ। कारों को तेज दौड़ाओ। जिस भी पार्टी में हो, उसका झंडा फहराओ। अगर टोपी, पटका और झंडा न हो तो नेता में क्या फर्क.. ? पेट्रोल या डीजल किसी और से भरवाओ।
तुम जब चलो। लगे, नेताजी का काफिला है।
जनता किनारे खड़ी हो जाए। बुझे मन से नहीं, अकड़ कर चलो। कोई बुलाए तो अकेले मत जाओ। फौज लेकर जाओ। लगना चाहिए, नेता हो। हमारी पार्टी का नेता। भीड़ से अलग दिखो।
पक्ष में हो या विपक्ष में। बॉल दूर तक फेंको
यही जनतंत्र है। दावे करो। वादे करो। हम कल आयेंगे। हम कल फिर आयेंगे। हम ही आयेंगे।
सरकार बनाने वाला चुप है। वह तो बस न्यूज सुनता है। दांव लगाता है। बहस करता है। पोस्ट डालता है। परस्पर उलझता है। बिना बात बैर मोल लेता है। एक एक वोट पर झगड़ा करता है। पुलिस की लाठी खाता है। सरकार…हमारी बनेगी। नहीं..नहीं..हमारी बनेगी। पता चला। मिलीजुली सरकार बन गई। सूर्य के रथ में अश्व लगने थे। खर लग गए।
याद रखो। तुम सरकार नहीं हो। सरकार कोई और है। जो सामने है। वो भी सरकार नहीं है। उसके पीछे भी सरकार है। तुम जनता हो..वोट दो। तुम वोटर हो। सरकार नहीं।
सूर्यकांत
07.09.2025