पप्पू पास हो रहा...!
राजनीति में भी, गजबे ही रास हो रहा।
गप्पू फेल हो रहे हैं, पप्पू पास हो रहा।।
छींटाकशी से पहले, इज़्ज़त उछाले।
फिर दल को बदल, गलबहियां भी डाले।।
आम आदमी खातिर, स्वांग खास हो रहा।
गप्पू फेल हो रहे हैं, पप्पू पास हो रहा।।
शक्कर की डली, कड़वे गुड़ के निवाले।
डाल चारा नया, जो भी चाहें नचा ले।।
जनता को जमूरों सा, एहसास हो रहा।
गप्पू फेल हो रहे हैं, पप्पू पास हो रहा।।
खाद ऐसा न कोई, जो ये खाते न हो।
नेता कैसा जो कोयला, पचाते न हो।।
अब मलाई सा उनके लिए, घांस हो रहा।
गप्पू फेल हो रहे हैं, पप्पू पास हो रहा।।
हो अगूंठा छाप या, नौंवीं फेल रसिया।
जानता हो भावनाओं का, खेल रसिया।।
मेठ जोकर गड्डी का, शाहे ताश हो रहा।
गप्पू फेल हो रहे हैं, पप्पू पास हो रहा।।
ताज इनके सर पर, पहनाते हमलोग।
जीतते हैं ये मोहरा, बन जाते हमलोग।।
फिर भी जनता को ही, बांस हो रहा।
गप्पू फेल हो रहे हैं, पप्पू पास हो रहा।।
©® पाण्डेय चिदानन्द “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०६/०९/२०२५)