है देखा जबसे तुझे ऐ जाना...!
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना, तू ख्वाब में भी सता रही है।
तुहीं डुबायेगी गर्त में मुझे, तेरी ये हरकत बता रही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
हथेली से मुंह छिपा रही हो, या मेहंदी हाथ कि दिखा रही हो।
अदा ये शर्माने वाली तेरी, तुझे ही कातिल बना रही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
न है कबूतर का यह जमाना, जो प्रेम पाती को ले के जाए।
तभी तो नाज़ुक सी अंगुलियों से, वो फोन नम्बर जता रही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
ये जानती है कि मुझ सा आशिक, निकाल रखेगें दिल को अपना।
तभी झरोखे पे तूँ फुदक कर, शरम की जाली हटा रही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
जो देखा था कल इंस्टा पे तेरे, अभी भी कह दे वो तूँ नहीं है।
नहीं तो बोलेगी दुनिया सारी, ये हमको क्या क्या सीखा रही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
है भूल मेरी, किया था लाइक, लगा अँगूठा जो पोस्ट तेरा।
मैं हूँ पड़ोसी ये जानते ही, क्यों पोस्ट सारे हटा रही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
कसम खुदा की मै माँगू माफी, शादीशुदा मै नहीं कुंवारा।
अभी भी वक्त है सम्भल जा ‘चिद्रूप’, अभी भी तेरी खता नही है।।
है देखा जबसे तुझे ऐ जाना…
©® पाण्डेय चिदानन्द “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०३/०९/२०२५)