दोहा सप्तक. . . . संबंध
दोहा सप्तक. . . . संबंध
रिश्तों का मतलब मिटा , क्षीण हुए सम्बंध ।
भूल गए सब जिंदगी, जीने की सौगंध ।।
आपस का आदर मिटा , मिटी मिलन की चाह ।
कौन किसी की देखता , अब आने की राह ।।
क्या था जो अब घट गया, संबंधों में यार ।
सूना सा लगने लगा, अब प्यारा संसार ।।
टूटे पतली डोर से, आपस के संबंध ।
नफरत की सीलन बढ़ी, मिटी प्रेम की गंध ।।
संबंधों में अब नहीं, पहले वाली बात ।
अपनेपन की आड़ में, अपने दें आघात ।।
खारापन हावी हुआ, अब रिश्तों के बीच ।
दुर्गंधित अब स्वार्थ का, फैल रहा है कीच ।।
धीरे-धीरे मिट रहा, संबंधों में मेल ।
मिलना आपस का हुआ, नाम मात्र का खेल ।
सुशील सरना / 7-9-25