पूछता है ये दिल
पूछता है ये दिल कहो ना कब आओगे
बेकरारी बेचैन दिल की कहो कब मिटाओगे
पूछता है ये दिल
मन की बेसब्री पर इख्तियार होता नहीं
साथ बैठकर पल दो पल कब मुस्कुराओगे
पूछता है ये दिल
चाहतें हैं अगर दिल में तो दूरियाँ कैसी
राज क्या है ये आखिर कब पर्दा उठाओगे
पूछता है ये दिल
बीत जाती है यूँ ही रात चाँद को तकते
सर पर हाथ रख सुकून से कब सुलाओगे
पूछता है ये दिल
अभी अधूरे हैं ख्वाब सब तुम्हारे बिना
साज सूना है जिंदगी का कब गुनगुनाओगे
पूछता है ये दिल
छोड़ दो अब ख्वाबों खयालों में आना
कहो कब तक मेरी हकीकत बन जाओगे
पूछता है ये दिल
“V9द” लम्बी हुई इंतजार की घड़ियाँ
सांस थम जाएँगी जब क्या फिर आओगे
पूछता है ये दिल