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7 Sep 2025 · 1 min read

दो गज जमीं के लिए

बदल रहे हैं सभी पहलू जिन्दगी के लिए
आज जरूरत नहीं है आदमी की आदमी के लिए

ना वो प्यार ना सौहार्द ना अपनत्व ही रहा
रिश्ते अब बिखरने लगे हैं दो गज जमीं के लिए
आज जरूरत नहीं है

दौलत वालों का है शौहरत वालों से रिश्ता
मुँह फेर बैठे हैं अपनों से दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है

शहर वालों ने तोड़ डाले हैं गाँव से बंधन
हक की बात उठने लगी दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है

माँ-बाप तरसते हैं जिनकी परछाईयों को
रुठे हैं आज वही उन्ही से दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है

सब मुसाफिर हैं साथ कुछ ले जाना नहीं
क्यों तल्खियां हैं फिर ये दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है

जिन्दगी भर जिससे कोई गिला ना हुआ
निकल रहीं हैं खामियाँ दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है

“V9द” इंसान को हो गई है जमीं प्यारी
इसीलिए टूट रहें रिश्ते ये दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है

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