दो गज जमीं के लिए
बदल रहे हैं सभी पहलू जिन्दगी के लिए
आज जरूरत नहीं है आदमी की आदमी के लिए
ना वो प्यार ना सौहार्द ना अपनत्व ही रहा
रिश्ते अब बिखरने लगे हैं दो गज जमीं के लिए
आज जरूरत नहीं है
दौलत वालों का है शौहरत वालों से रिश्ता
मुँह फेर बैठे हैं अपनों से दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है
शहर वालों ने तोड़ डाले हैं गाँव से बंधन
हक की बात उठने लगी दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है
माँ-बाप तरसते हैं जिनकी परछाईयों को
रुठे हैं आज वही उन्ही से दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है
सब मुसाफिर हैं साथ कुछ ले जाना नहीं
क्यों तल्खियां हैं फिर ये दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है
जिन्दगी भर जिससे कोई गिला ना हुआ
निकल रहीं हैं खामियाँ दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है
“V9द” इंसान को हो गई है जमीं प्यारी
इसीलिए टूट रहें रिश्ते ये दो गज जमीं के लिए
आज जरुरत नहीं है