#मुक्तक...
#मुक्तक…
बदले #हालात, देते #सबक।
(प्रणय प्रभात)
“मिल गए दिल दिमाग़ आपस में,
दूरियां वक़्त ने घटा दी हैं।
वो जो सूखे में बन
गईं थीं कभी,
बाढ़ ने सरहदें मिटा दी हैं।।”
#कथ्य…
चार पंक्तियों को आपदा काल से अलग जीवन के व्यापक संदर्भ में भी देखें। जहां बुरे समय में अभाव और प्रभाव वालों के बीच दूरियां बढ़ जाती हैं, जबकि हालात बदलते ही सारे फासले खत्म हो जाते हैं। हुआ ना साबित कि बुरा वक़्त अच्छे वक़्त से बेहतर होता है।