Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
7 Sep 2025 · 1 min read

*साम्ब षट्पदी---*

साम्ब षट्पदी—
07/09/2025

समर्थक।
बदल रहे हैं,
जो पड़े थे अनर्थक।।
उनकी महत्वाकांक्षा बढ़ी।
होना चाहते अब वो भी महान,
यहीं से होके जाने वाली राहें हैं गढी।।

निरर्थक।
सब प्रवंचक।।
अपनी चिंता के धनी।
अपनों से आज खूब ठनी।।
होना चाहते अब सारे आजाद।
ये सल्तनत कर जायेंगे बरबाद।।

प्रवर्तक।
नयी राह देते।
क्रांति घटित करते,
चिंतन के ताल स्वर लेते।।
नयी दृष्टि से नयी सृष्टि की सोच,
बनाना चाहते और श्रेष्ठ आकर्षक।।

— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)

[][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][]

Loading...