और इस तरहां मैं हो गया अकेला
और इस तरहां मैं हो गया अकेला।
कभी साथ था मेरे लोगों का मेला।।
मेले में बस मैं, रह गया अकेला।
और इस तरहां मैं—————-।।
पैसा लुटाया तो रहते थे साथ सब।
खून बहाया तो देते थे साथ सब।।
जब बांटना चाहा दर्द मैंने अपना।
नहीं कोई मेरा हमदर्द निकला।।
और इस तरहां मैं————-।।
आई मुसीबत तो दूर हुए अपनें।
रिश्तों ने तोड़े हैं सुंदर मेरे सपनें।।
यार भी आखिर निकले बेवफ़ा ही।
हर फूल से आखिर नश्तर निकला।।
और इस तरहां मैं—————।।
खिलौना समझ उसने खेला मेरे दिल से।
लगा लिया दिल उसने, अमीर किसी दिल से।।
सपनें दिखाये बहुत किया मौज उसने।
बदनाम करके मुझको कर दिया अकेला।।
और इस तरहां मैं—————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)