दोहा पंचक. . . . प्रेम अनुभूति
दोहा पंचक. . . . प्रेम अनुभूति
संकेतों का हो गया, जब पूरा दस्तूर ।
अभिसारों को हो गया,फिर यह दिल मजबूर ।।
दुर्लभ है संसार में, मिलना सच्चा प्यार ।
वादों के प्रासाद में, तन का है व्यापार ।।
नैनों की भाषा पढ़ें, नैन भले सौ बार ।
चैन मिले केवल तभी , जब होता अभिसार ।।
अभिसारों को हो गए, मुदित नयन मजबूर ।
हुआ छुअन के वेग से , तन में तन फिर चूर ।।
पीर प्रतीक्षा की बड़ी, होती हैं विकराल ।
हर पल बीते कल्प सा, बहे नैन का ताल ।।
सुशील सरना / 6-9-25