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6 Sep 2025 · 1 min read

दोहा पंचक. . . . प्रेम अनुभूति

दोहा पंचक. . . . प्रेम अनुभूति

संकेतों का हो गया, जब पूरा दस्तूर ।
अभिसारों को हो गया,फिर यह दिल मजबूर ।।

दुर्लभ है संसार में, मिलना सच्चा प्यार ।
वादों के प्रासाद में, तन का है व्यापार ।।

नैनों की भाषा पढ़ें, नैन भले सौ बार ।
चैन मिले केवल तभी , जब होता अभिसार ।।

अभिसारों को हो गए, मुदित नयन मजबूर ।
हुआ छुअन के वेग से , तन में तन फिर चूर ।।

पीर प्रतीक्षा की बड़ी, होती हैं विकराल ।
हर पल बीते कल्प सा, बहे नैन का ताल ।।

सुशील सरना / 6-9-25

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