नेतृत्व के सवाल पर कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी के विचार
शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी की✍️ कलम से
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नेतृत्व के सवाल पर
साथियों,,
लाल जोहार
सुभाषचंद्र बोस को नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम से पुकारा जाता था। अंग्रेज साम्राज्यवादियों के खिलाफ संघर्ष में भारत की जनता अपने नेताओं को प्यार और इज्जत के साथ याद करती थी। उनके पीछे मर-मिटने को आम जनता तैयार रहती थी। नेता और नेतृत्व के प्रति आम जनता का भरोसा था।
अब नेता कहने का मतलब एक चर्बी युक्त पेट वाला व्यक्ति का चेहरा सामने आता है सफेद खादी की धोती कुर्ता और गांधी टोपी लगाकर बाजार- हाट, कोर्ट, विधानसभा एवं लोकसभा में व्यस्त नजर आता है। इन खादीधारियों का मुख्य काम अफसरशाही की चापलूसी करना दिल्ली भोपाल और लंदन में भाषण देना होता है। ये मुख्य तौर पर जमींदार, साहूकार या व्यापारी वर्ग के होते हैं। चापलूसी करना उनका स्वभाव होता है। उनका तो यह सिद्धांत बन जाता है कि
“जिधर बम उधर हम”।
इन नेताओं के चक्कर में कितने साल बीत गये हैं। आज नेता शब्द के प्रति नफरत की भावना पैदा हो गई है। अब यह आम बात हो गई है
“ज्यादा नेतागिरी मत करना” फिर भी नेता की जरूरत पड़ती है. नेता के बिना काम नहीं चलता नेता ढ़ुंढ़ना पड़ता है।
आज देश की हालात देखते हुए लोगों को यह बात समझ में आती है कि संघर्ष के बिना मुक्ति नहीं है।
संघर्ष करने के लिए सही नेतृत्व की जरूरत पड़ती है। सही नेतृत्व आयेगा कहां से? आसमान से टपकेगा या खद्दर धारियों को पकड़ना पड़ेगा। इस सवाल का उत्तर पाने के लिए नेता और नेतृत्व शब्द का मतलब गहराई से समझना पड़ेगा।
नेता वह है जो सबसे ज्यादा वर्ग सचेतन है। नेता शब्द के पीछे वर्ग सचेतनता या वर्ग चेतना शब्द आ जाता है। नेता वर्ग के आधार पर ही होता है।
समाज में मुख्य तौर दो वर्ग हैं – एक शोषक वर्ग (जमींदार, साहूकार दलाल पूंजीपति) एवं दूसरा शोषित वर्ग (मजदूर, किसान)। ऊपर जिन खद्दर धारी नेताओं की चर्चा हुई है ,वे लोग शोषक वर्ग के नेता है।
हमें शोषक वर्ग या लुटेरे वर्ग से मतलब नहीं , हमें मजदूर किसान वर्ग को नेतृत्व देने के बारे में सोचना है।
मजदूर किसानों का नेतृत्व मजदूर किसानों की पार्टी के लोगों से होता है, जो मजदूर -किसानों की राजनीति से जुड़ी होती है।
पार्टी का मतलब है इस वर्ग का हथियार।
क्या लुटेरे वर्ग का नेता मजदूर किसान वर्गको नेतृत्व दे सकता है? जी नहीं।
लुटेरा वर्ग मजदूर-किसानों को धोखा देकर अपने साथ अवश्य रखता है, परंतु किसान-मजदूरों के हित के लिए नहीं, बल्कि अपने फायदे के लिए मजदूर किसानों की खुशामद करता है।
मजदूर किसान वर्ग का हित तभी संभव है जब किसान भाइयों की सही पार्टी बनेगी और उसका नेतृत्व मजदूर नेता कुर्बानी की भावना से ओत-प्रोत होकर संभालेगा।
जनता को चाहिए कि वह लुटेरे वर्ग के नेतृत्व से घृणा करे और मजदूर वर्ग के नेतृत्व में भरोसा करे। मजदूर वर्ग को भी चाहिए कि वह व्यापक जनता का भरोसा-पात्र बनने के लिए निरंतर कोशिश जारी रखे एवं छत्तीसगढ़ और भारत की पीड़ित शोषित जनता के मुक्ति संघर्ष में बहादुरी के साथ आगे बढ़े।
लाल जोहार
राम चरण नेताम
छत्तीसगढ़ माईंस श्रमिक संघ
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
दल्ली राजहरा