प्रलय ने देखो हाहाकार मचाया है
प्रलय ने देखो हाहाकार मचाया है
लेकिन नेताओं का तो तनिक भी हृदय न पिघल पाया है
खुद ही जनता ने अपनो लिए फिर कदम यह उठाया है।।
जो जिस घर से मिल जाए
इकट्ठा कण कण वो करने लगे हैं।
नहीं आशा उन्हें अब और किसी से
खुद ही अपनों का पेट भरने लगे है।।
अशिक्षित जनता ही एक दूसरे की सेवा को तत्पर हो उठी
सेवा खाई जिन्होंने जनता की
उनको तो उनकी हाय भी न लगी।।
हरमिंदर कौर, अमरोहा