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6 Sep 2025 · 1 min read

प्रलय ने देखो हाहाकार मचाया है

प्रलय ने देखो हाहाकार मचाया है
लेकिन नेताओं का तो तनिक भी हृदय न पिघल पाया है
खुद ही जनता ने अपनो लिए फिर कदम यह उठाया है।।

जो जिस घर से मिल जाए
इकट्ठा कण कण वो करने लगे हैं।
नहीं आशा उन्हें अब और किसी से
खुद ही अपनों का पेट भरने लगे है।।

अशिक्षित जनता ही एक दूसरे की सेवा को तत्पर हो उठी
सेवा खाई जिन्होंने जनता की
उनको तो उनकी हाय भी न लगी।।

हरमिंदर कौर, अमरोहा

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