हम हैं राही शांत डगर के, अब बाजों ने ठाना है।
हम हैं राही शांत डगर के, अब बाजों ने ठाना है।
चुटकी भर सिंदूर की ताकत, दुनिया ने पहचाना है।
काँप उठी दुश्मन की धरती, सुनी गर्जना शेरों की।
दहशतगर्द मिले मिट्टी में, कहीं न बचा ठिकाना है।
@डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’