मेरा दीवानापन
मेरा दीवानापन देखो तुझे बार बार तकना
सितम उस पे ये ,दिल का तेज़ धड़कना
मुड़ कर इक बार भी ,तूने न मुझे देखा
शायद मेरे हाथ में नहीं ,तेरे नाम की रेखा
लोग मुझे दीवाना , और बोले आवारा
ये तेरी चाहत का जानम है किस्सा सारा
अपनी दीवानगी को कैसे आखिर छुपाए
कहीं भी रहे, लौट के बुद्धु घर को आए
सुरिंदर कौर