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5 Sep 2025 · 2 min read

नये भारत के लिए नया छत्तीसगढ़

साथियों,,
लाल जोहार
‘शोषकों की जागीर नहीं, छत्तीसगढ़ हमारा है
‘हमारे देशप्रेम की पहचान… हमारा छत्तीसगढ़
और’
नये भारत के लिए नया छत्तीसगढ़
इन तीन बुलंद और सार्थक नारों को सुनकर शासक शोषक वर्ग घबराहट से कांपने लगता है। इसके विपरीत शोषित, पीड़ित जनता के दिल में आता है अपार आनंद, मन में आते हैं नये समाज के सपने। साथ में अपनी राष्ट्रीयता की पहचान प्रतिपादित करने की आकांक्षा प्रबल हो उठती है।
राष्ट्रीयता के सवाल पर जनमानस को ब्यापक सामाजिक हित में आंदोलित करने में कामरेड शंकर गुहा नियोगी के ये तीन नारे सचमुच अनूठे हैं। इन नारों के साथ कामरेड नियोगी जी ने विकास की दिशा और प्राथमिकताओं का सवाल भी जोड़ दिया।
असली बात छतरागढ़ को अलग राज्य का दर्जा देने की नहीं थी, परन्तु एक’ छोटा और सुंदर राज्य शोषणाविहीन छत्तीसगढ़ बनाने की थी। इसीलिए नियोगी जी ने राष्ट्रीयता के स्वशासन का अधिकार हासिल करने के संघर्ष में मजदूर वर्ग की नेतृत्वकारी भूमिका को आवश्यक माना इस संघर्ष में उनकी “श्रम पुत्र” मजदूर और “भूमि पुत्र” किसान की संयुक्त भूमिका की अवधारणा एक विशेष उपलब्धि है।
नियोगी जी ने राष्ट्रीयता के विकास की लड़ाई को “संघर्ष और निर्माण” के दर्शन के साथ जोड़कर भारत के नवनिर्माण के प्रश्न को एक नया आयाम दिया है। और साथ में देशप्रेम की एक नयी परिभाषा दी है, जो पूरी तीसरी दुनिया में उठ रहे राष्ट्रीयता के संघर्ष को समाज प्रेमी, न्यायशील और जनवादी परिप्रेक्ष्य में ढालने का रास्ता दिखाती है।
इस परिप्रेक्ष्य में नियोगी जी के उपर्युक्त तीनों नारे, और उनका छोटा सुन्दर और शोषण विहिन राज्य छत्तीसगढ़ का सपना एवं संघर्ष और निर्माण का दर्शन भारत के विभिन्न अंचलों में राष्ट्रीयता के विकास के लिए चल रहे संघर्ष को एक ताजगी और नयी रोशनी देते हैं। इसी में छिपा है कश्मीर, पंजाब, झारखंड, बोडोलैंड, गोरखालैंड, उत्तराखंड आदि प्रश्नों का लोकतांत्रिक देशप्रेमी समाधान।
इसी के गर्भ में से हम देश में सुलगायी गयी साम्प्रदायिक आग को बुझाने और उसकी जगह जनवादी एकजुटता स्थापित करने का तार्किक रास्ता भी खोज सकते हैं।
यही है कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी का नये भारत का सपना।
लाल जोहार
राम चरण नेताम
छत्तीसगढ़ माईंस श्रमिक संघ
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा

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