क्यों हो रहे हो विकल ,
क्यों हो रहे हो विकल ,
क्यों यह हाहाकार मचाया हुआ है ।
तुम्हारी करनी का ही परिणाम है यह ,
हे मनुष्य ! जो नदियों ने। बाढ़ के रूप में बहाया है ।
क्यों हो रहे हो विकल ,
क्यों यह हाहाकार मचाया हुआ है ।
तुम्हारी करनी का ही परिणाम है यह ,
हे मनुष्य ! जो नदियों ने। बाढ़ के रूप में बहाया है ।