शिक्षक - एक राष्ट्र निर्माता
शिक्षक – एक वो मोमबत्ती हैजो स्वयं को जलाकर, खपाकर दूसरों को प्रकाशित करता है, और उसे कभी भी ये आत्मश्लाघा नहीं होती कि उसने खुद को जलाकर समाज को प्रकाशित किया है
इसीलिए गुरू का स्थान सर्वोपरि है क्योंकि वह निःस्वार्थ भाव से अपना कार्य अनवरत करता है । गुरू का कोई एक दिन ही विशेष नहीं होता बल्कि हर दिन गुरु विशेष होते हैं।
सभी गुरुजनों को नमन, वंदन, अभिनंदन 🙏💐💞
✍️ अरविंदों उवाच: