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5 Sep 2025 · 1 min read

रचना

दर्द अपना छिपाकर
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दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे
थके-थके थे पांव
हम निरन्तर चलते रहे
जमाने को आजमाना छोड़
हम स्वयं को आजमाते रहे ।

दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे
सूरत अपनी बिगाड़ी
आईना दूसरों को दिखाते रहे
जिंदगी भर पिसे
अपनों को बचाते रहे ।

दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे ।।

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश 283111
9627912535

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