वही गुरु कहलाता है।
वही गुरु कहलाता है। टेर
सही-गलत में भेद बताए,
सत्य, न्याय पर हमें चलाए,
मन में कोई द्वंद छिड़ा हो,
उसको भी गर वो सुलझाए
सच्चा उससे नाता है।
वही गुरु कहलाता है।।1।।
मुश्किल से जब मन घबराए।
लड़ना हमको वो सिखलाए,
तमस हृदय में ज्योति जलाए,
मन-मंदिर ओजस भर जाए,
सबके मन को भाता है।
वही गुरु कहलाता है।।2।।
सारा जहाँ रोशन कर जाए,
अंधकार को दूर भगाए,
हैं प्रणम्य वो सारे शिक्षक,
शिक्षा की जो ज्योति जलाए,
विषय सभी समझाता है।
वही गुरु कहलाता है।।3।।
तन्मयता से रोज पढ़ाएं,
सभी छात्र के ज्ञान बढ़ाए,
पूजनीय वो सारे शिक्षक,
नवपथ पर चलना सिखलाए,
मन कृतज्ञ हो जाता है।
वही गुरु कहलाता है।।4।।
सिर्फ़ क़िताबी ज्ञान न देकर,
जीवन जीना भी सिखलाए,
विद्या रूपी धन देकर वह,
लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाए,
जीवन सफल बनाता है।
वही गुरु कहलाता है।।5।।
@स्वरचित व मौलिक
कवयित्री शालिनी राय ‘डिम्पल’
आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश।