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4 Sep 2025 · 1 min read

लब यूँ ख़ामोश कि क़दम न चल रहे थे,

लब यूँ ख़ामोश कि क़दम न चल रहे थे,
अनकही आरज़ूओं से बस दिल जल रहे थे

©️ डॉ. शशांक शर्मा “रईस”

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