मैंने देखा है - ५
मैंने देखा है
मनुष्य का बदलता आकार प्रकार
नहीं रहा पहले सा बिल्कुल भी आचार
लूट, हत्या, अपहरण, डकैती, अत्याचार
चोरी, धोखाधड़ी और बलात्कार
हिंसा, आगजनी, बंद, चक्का जाम
रोज देख लीजिए तमाम
सीमा से पार भ्रष्टाचार
लेकिन अफसोस है यार
नहीं छापता कोई अखबार
प्रेस को आया है मियादी बुखार