खिला है फूल
कुण्डलिया
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जीवन छोटा ही सही, खूब खिला है फूल।
सबके मन को भा रहा, रहा खुशी से झूल।
रहा खुशी से झूल, लिए उन्मुक्त भावना।
कल की चिन्ता छोड़, आज उसका है अपना।
कहते वैद्य सुरेन्द्र, पूर्णता का यह दर्शन।
दर्शाता है पुष्प, लिए छोटा सा जीवन।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य