क्या करें ऐसे नेताओं का जो सरकारी खज़ानो में से खाते हैं।
क्या करें ऐसे नेताओं का जो सरकारी खज़ानो में से खाते हैं।
आए विपदा देश पर कोई
तो फिर सिर्फ चर्चाओं में फोटो खिंचवाते है।
इससे मिलना उससे मिलना
समाचारों में दिखलाते है ।
भरकर खजाना अपनी
तिजोरियों का वो आराम से सोते हैं।
क्या इसी दिन के लिए ये नेता चुने जाते हैं
शोषक तो ये बन जाते हैं
शोषित जनता को करते हैं।
मूर्ख जनता ऐसों को ही
अपना नेता चुनती है।।
हरमिंदर कौर, अमरोहा