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4 Sep 2025 · 1 min read

*किसे पता क्या कितना जीवन, आयु भला क्या पाई है (मुक्तक)*

किसे पता क्या कितना जीवन, आयु भला क्या पाई है (मुक्तक)
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किसे पता क्या कितना जीवन, आयु भला क्या पाई है
बीत रही है भोर दुपहरी, संध्या देखो आई है
जो करना है अभी करो बस, कर्मठ बन रण-प्रांगण में
जीवन का आह्लाद तभी तक, तन-मन में तरुणाई है

रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451

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