*किसे पता क्या कितना जीवन, आयु भला क्या पाई है (मुक्तक)*
किसे पता क्या कितना जीवन, आयु भला क्या पाई है (मुक्तक)
_________________________
किसे पता क्या कितना जीवन, आयु भला क्या पाई है
बीत रही है भोर दुपहरी, संध्या देखो आई है
जो करना है अभी करो बस, कर्मठ बन रण-प्रांगण में
जीवन का आह्लाद तभी तक, तन-मन में तरुणाई है
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451