विविधता ही बहुआयामी सोच को परिलक्षित करते हैं। जो नवीनता को
विविधता ही बहुआयामी सोच को परिलक्षित करते हैं। जो नवीनता को बनाये रखते हैं। इसे समझने की अवश्यकता है।
संजय निराला
विविधता ही बहुआयामी सोच को परिलक्षित करते हैं। जो नवीनता को बनाये रखते हैं। इसे समझने की अवश्यकता है।
संजय निराला