अंशवी चौरसिया जो डॉ. सुनील चौरसिया 'सावन' की छात्रा है, की रचना
माता और पिता जीवन की वज़ह
माता और पिता यह दो हमारे ऐसे भगवान हैं जिनकी जगह हमारी जिंदगी में ना कोई ले सकता था, ना ले सकता है और ना कोई ले सकेगा। उनके लिए हम जो भी करें वह कम है क्योंकि इन्होंने हमारे भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए क्या कुछ नहीं किया। हमारे फिक्र में कितनी बार उन्होंने अपना पेट काटा है। अपने बच्चों के लिए उन्होंने कितनी मुश्किलें झेली हैं जिसका कभी अनुमान भी नहीं लगा सकते और मेरे लिए तो मेरी जिंदगी की वजह ही मेरे माता-पिता हैं। मेरे माता-पिता मेरे लिए भगवान हैं और उनकी जगह तो सच में जिंदगी में कोई नहीं ले सकेगा क्योंकि यह अपने आप में ही अनमोल हैं। अब हमारी बारी है इनका साथ देने के लिए क्योंकि इनका मकसद ही यही है कि हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचा सकें और हमारे लिए हमारा यह उद्देश्य होना चाहिए कि इनके दर्शाए हुए मार्ग पर चलना कि अगर हम माता-पिता के बताए मार्ग पर चलेंगे तो हमें सफल होने से कोई रोक नहीं सकता है। चाहें हम इस जिंदगी में किसी से भी धोखा करें पर कभी भी मां-बाप से धोखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह अपने बच्चों पर इतना विश्वास करते हैं जितना तो कोई शायद करता होगा। इस विश्वास को हमें कभी नहीं तोड़ना चाहिए बल्कि उनके बताए हुए मार्ग पर हमें खरा उतरना चाहिए। उनके विश्वास पर हमें खरा उतरना चाहिए ताकि एक दिन मम्मी-पापा को भी हमारे ऊपर बहुत गर्व हो। मम्मी और पापा अपने बच्चों पर बहुत ही ज्यादा भरोसा करते हैं और जब इनका भरोसा टूटता है तो कभी भी बच्चा सफल नहीं हो पाता है।
सच में माता-पिता भगवान से कम नहीं हैं।
अंशवी चौरसिया
कक्षा 9
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय गांगरानी कुशीनगर।