मोनालिसा (कविता)
‘लियो’ की तूलिका से निकली
एक छवि अद्भूत निराली
रहस्य भरी आँखों में उसकी
भरी थी अनगिनत कहानी।
मुस्कान में थी जादू उसके
देख जैसे समय ठहर जाए।
पड़े नजर जिसकी भी उसपर
दिल में हलचल सी हो जाए।
सदियों से वह रुकी रही
उसकी आकर्षण भी वही रही
करे सवाल हर युग उससे
पर उत्तर उसकी मौन रही।
मुस्कान उसकी या ख्वाब है
या दफ़न थी उसमें राज कोई
जहाँ भी दिखे वह वैसी ही लगे
जैसे कला की जादू कोई ।
रहस्यमयी मुस्कान है उसकी
भिन्न-भिन्न कोण बदलती है
कहते है इसे ‘ला जोकोंदा’
‘डेल जियोकोंदो’ की वो पत्नी थी।
शोभा की उसकी अमर कथा
लियो की वो अमर निशानी
हर युग में हर दौड़ में दिखी
सुंदरता की उसकी चिर कहानी
मोनालिसा एक पेंटिंग नहीं
इतिहास की एक अमर निशानी
कला, रहस्य की ये संगम है
खुद ही कहती अपनी कहानी।
इन्दु सिंह, हैदराबाद