*साम्ब षट्पदी---*
साम्ब षट्पदी—
03/09/2025
बताइए।
कभी मत पीड़ा,
अंतस में सजाइए।।
अधिक ही सँवर जाओगे।
अपने अंदर के इंसान का ही,
अवश्य एक नया संस्करण पाओगे।।
निखारिए।
नया बनाइए।।
यही अवसर जानो।
बुजुर्गों का कभी कहा मानो।।
जो है उसकी कद्र करना सीख।
बात बात पर यूँ नहीं माँगिए भीख।।
सराहिए।
सबको मगर।
मगर लेते रहिए,
अपनी भी हो थोड़ी खबर।।
अपने गुण दोष को करीब से,
आलोचक बनकर कभी निहारिए।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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