मुक्तक : शौक से
मझधार में कश्तियांँ खेते हैं बड़े शौक से!
लोग दर्द आजकल देते हैं बड़े शौक से!
क्यों न आप दवा के रूप में भी लेते उसे,
लोग जिसे रोजाना लेते हैं बड़े शौक से!
मझधार में कश्तियांँ खेते हैं बड़े शौक से!
लोग दर्द आजकल देते हैं बड़े शौक से!
क्यों न आप दवा के रूप में भी लेते उसे,
लोग जिसे रोजाना लेते हैं बड़े शौक से!