मुक्तक : साथ
कौन किसका सारथी है कौन किसका नाथ है।
कौन जाने किस जने के शीश किसका हाथ है।
लग रहा है दूर ज्यादा तो नहीं मंजिल बची,
क्या पता है और कितने दिन किसी का साथ है।
कौन किसका सारथी है कौन किसका नाथ है।
कौन जाने किस जने के शीश किसका हाथ है।
लग रहा है दूर ज्यादा तो नहीं मंजिल बची,
क्या पता है और कितने दिन किसी का साथ है।