विश्वास किस पर यहाँ हम करें
लगे सब हमको यहाँ मतलबी, विश्वास किसपे यहाँ हम करें।
दिल से वफ़ा यहाँ नहीं कोई, तारीफ किसकी यहाँ हम करें।।
लगे सब हमको यहाँ मतलबी——————–।।
ऐसा लगा था हमको वह, दिल से बहुत ही होगा साफ़।
वह फर्ज अपना निभायेगा, ना कोई उसमें होगा पाप।।
अब वो निगाहें चुराता है हमसे, उम्मीद किससे यहाँ हम करें।
लगे सब हमको यहाँ मतलबी——————।।
बेशक मोहब्बत जिनसे थी, चाहा था रूह ने जिनको बहुत।
हमें भी खुशी मिलती थी, वो थे करीब इस दिल के बहुत।।
उन्होंने ही आज छोड़ा है साथ, चाहत किसकी यहाँ हम करें।
लगे सब हमको यहाँ मतलबी——————।।
शायद उनको पसंद नहीं थी, यह मुफलिसी हमारी।
महल हमारे पास नहीं है, बस्ती नहीं है हसीं हमारी।।
इसलिए हमसे दूर वो हुए हैं, यारी किससे यहाँ हम करें।
लगे सब हमको यहाँ मतलबी—————-।।
वादें- वफ़ा सब है सिर्फ दिखावा, हमदर्द सच्चा कोई नहीं।
दौलत से सबको प्यार है, यही है रिश्ता और कोई नहीं।।
यहाँ प्यार की नहीं कोई कदर, मोहब्बत किससे यहाँ हम करें।
लगे सब हमको यहाँ मतलबी——————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)