इश्क का ऐसा सिलसिला रखना
इश्क का ऐसा सिलसिला रखना
क़ुर्बतों में भी फासला रखना
आंधियां जब तेरे मुकाबिल हो
तुम चिरागों सा हौसला रखना
मैं अमावस की रात आऊँ तो
दर पे अपने दिया जला रखना
मंज़िले तो करीब हैं तेरे
बस हिफ़ाज़त से काफ़िला रखना
तेरी सूरत से सामना होगा
आईने में भी कुछ जिला रखना
हाय इस दौर-ए -रायगानी में
चेहरा तेरा खिला-खिला रखना