आलेख। भाषा
जीवन में भाषा का बहुत महत्व होता है । भाषा कोई भी हो लेकिन उसमें एक देश , समाज और परिवार समाया हुआ होता है । भाषा में ही उस देश की संस्कृति , इतिहास, संस्कार समाये हुए होते हैं ।
कोई भी भाषा कमजोर नहीं होती हैं, जरूरत होती है, उसको समृद्ध करने उसके प्रति नागरिकों का समर्पण और अधिकाधिक उस भाषा का उपयोग करना ।
अपने देश की भाषा के साथ साथ दूसरे देशों की भाषा को सीखना भी लाभप्रद होता है । बहुत भाषी होना व्यक्ति विशेष की उपलब्धता होती है
ऐसे बहुभाषी करियर में भी इसका लाभ उठाते हैं ।
भाषा को बहुआयामी बनाने के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और पुस्तकों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता है ।
पुस्तकों में संस्कार, इतिहास समाया हुआ होता है यह देश की अमूल्य धरोहर होती है । इसलिए पुस्तकों लेखन और पाठन पर विशेष ध्यान देना चाहिए और इसे बच्चों, युवाओं बुजुर्गों के प्रति प्रेरित करना चाहिए।
पुस्तकें पढ़ने से क्या क्या लाभ होते हैं :
हमारे जीवन में पुस्तकों का बहुत महत्व है । पुस्तकों से हमें ज्ञान और जानकारी प्राप्त होती हैं ।
हमारे महापुरुषों और इतिहासकारों ने धार्मिक पुस्तकें , ग्रन्थ और इतिहास लिखा है ।
पुस्तकें पढ़ने से हमें बहुत लाभ होता है , जैसे –
– पुस्तकें पढ़ने से हमें अपने देश की संस्कृति , रहन- सहन, रीति-रिवाज के बारे में पता चलता है ।
– पुस्तकें पढ़ने से याददाश्त तेज होती है ।
– पुस्तकें पढ़ने से व्याकरण, उच्चारण शुध्द होते हैं ।
– पुस्तकें पढ़ने के बाद हमारी सोचने- समझने की ताकत बढ़ती है और विचारधारा तेज होती है, जिससे हम भी पुस्तक लिख सकते हैं ।
– पुस्तकों का समुचित प्रकाशन , नियमित प्रकाशन होना चाहिए।
– बच्चों के लिए बाल पुस्तकें लिखी जाती हैं, जिससे उनकों पढ़ने से बच्चों का मनोरंजन भी होता है और शिक्षा भी मिलती है ।
– पुस्तकें पढ़ने वाले बच्चे अनुशासन में रहते ।
– अच्छी पुस्तकें बच्चों के भविष्य बनाने में बहुत योगदान देतीं है, क्यों कि इन्ही पुस्तकों के आधार पर वह नयी खोज कर सकते हैं ।
– आजकल बाल साहित्य पर बहुत
ध्यान दिया रहा है ।
पुस्तकों के बिना जीवन अधूरा है, आजकल मोबाइल, टेवलेट, कम्प्यूटर में बच्चे अपना ज्यादा समय देने लगे हैं , लेकिन यह एक सीमित समय के लिए ठीक है । इनका अधिक समय उपयोग करने से आँखों पर बुरा असर पढता है , और उपयोगी चीजों की जगह फालतू की चीजें भी देखने लगते है ।
अत: पुस्तकें हमारे जीवन की जरूरी वस्तु है, हमें अपने जीवन में समय निकाल कर अवश्य पढना चाहिए ।
भाषा विकास मे लिए सुझाव :
– एक राष्ट्रीय भाषा नीति बनाई जाये
– जगह जगह वाचनालयों की स्थापना की जानी चाहिए
– तकनीक विषयों पर उस देश की भाषा पर लेखन होना चाहिए।
– एक भाषा की दूसरी भाषा में अनुवाद सरल और सहज होना चाहिए
– एक दूसरे की भाषा का आदर करना चाहिए
– साहित्यकारों को प्रोत्साहित करना चाहिए
– समय समय पर निबंध, लेख प्रतियोगिता आयोजित करनी चाहिए
इस तरह से भाषा के महत्व को सभी को समझना चाहिए और अपनी संस्कृति, साहित्य और इतिहास को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर लेखन जारी रहना चाहिए।
संतोष श्रीवास्तव