सवाल बहुत है !
सवाल बहुत है !
डरी डरी सी ज़िन्दगी ,
हर आहट में खौफ है ,
बादल से भरा आसमान ,
बूँद को तरसती धरती
लम्हों की घुटन , अधूरे ख्वाब ,
टूटती साँस , छूटती आस ,
बस्तियाँ सहमी , सहमा चमन ,
दहशत का तूफ़ान ,
वक़्त परेशान बहुत है !
आजाद खंजर , कैद स्याही ,
तन्हाइयों का साथ , ग़म की परछाई ,
भूखा बचपन , मजबूर जवानी ,
धर्म का धंधा , सियासत अंधा
कोई भूखा… कोई नंगा….
अनपढ़ शासक , बिकती धरोहर
मौत शर्मिंदा , जिंदगी शर्मसार
बंद विद्यालय , खुली मधुशाला
बेरोजगारी का द्वार , बाबा का दरबार
सवाल बहुत है !
बाल कृष्ण मिश्रा
: 8700462852