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1 Sep 2025 · 1 min read

सवाल बहुत है !

सवाल बहुत है !

डरी डरी सी ज़िन्दगी ,
हर आहट में खौफ है ,
बादल से भरा आसमान ,
बूँद को तरसती धरती

लम्हों की घुटन , अधूरे ख्वाब ,
टूटती साँस , छूटती आस ,
बस्तियाँ सहमी , सहमा चमन ,
दहशत का तूफ़ान ,
वक़्त परेशान बहुत है !

आजाद खंजर , कैद स्याही ,
तन्हाइयों का साथ , ग़म की परछाई ,
भूखा बचपन , मजबूर जवानी ,
धर्म का धंधा , सियासत अंधा
कोई भूखा… कोई नंगा….

अनपढ़ शासक , बिकती धरोहर
मौत शर्मिंदा , जिंदगी शर्मसार
बंद विद्यालय , खुली मधुशाला
बेरोजगारी का द्वार , बाबा का दरबार
सवाल बहुत है !

बाल कृष्ण मिश्रा
: 8700462852

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