सुखमय
सुखमय
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सुखमय हर पल, जब मिलते हैं।
मधुर मधुर तब, मन खिलते हैं।
मत समझ अलग, सब अपने हैं।
मधुरिम प्रियकर, सब सपने हैं।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य, मण्डी (हि.प्र.)
सुखमय
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सुखमय हर पल, जब मिलते हैं।
मधुर मधुर तब, मन खिलते हैं।
मत समझ अलग, सब अपने हैं।
मधुरिम प्रियकर, सब सपने हैं।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य, मण्डी (हि.प्र.)