*साम्ब षट्पदी---*
साम्ब षट्पदी—
01/09/2025
स्वर्णकाल।
इसको बनायें,
टूटे सब भ्रमजाल।।
आत्मगौरव प्राप्त हों सब।
विश्वबंधुत्व हो साकार क्रिया में,
आओ सच्चे मन से प्रतिज्ञा ले लें अब।।
पड़ताल।
होता फिलहाल।।
सब कुछ तय होता।
सत्य सिसककर भी रोता।।
न्याय, न्यायालय, न्यायाधीश।
बिकते हैं सारे लेकर मोटी बख्शीश।।
हड़ताल।
सभी लोग मग्न।
संघर्षी का है नाटक,
पर्दे के पीछे पूरे हैं नंगे।।
लिफाफे का लेना देना सदा जारी,
ये कार्य में अपनाते विलंबित ताल।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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