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1 Sep 2025 · 1 min read

रामकथा : अंक - १

रामकथा जीवन सिखलाती जीवन भर।
राम लखन सीता भटके क्यों वन दर-दर।।

माँ संतति का अनहित भी कर सकती है।
जब कैकेई के शीश मंथरा करे असर।।

दसरथ एक चक्रवर्ती सम्राट रहे।
कैसे निगला पुत्र-मोह जैसा अजगर।।

गुरु वशिष्ठ या विश्वामित्र, सुमंत तथा।
मंत्रीगण क्या होंठ सिले उस अवसर पर।।

भरत शत्रुघन उसी समय ननिहाल गए।
प्रश्न आज तक चर्चा में हो रहा मुखर।।

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