रामकथा : अंक - १
रामकथा जीवन सिखलाती जीवन भर।
राम लखन सीता भटके क्यों वन दर-दर।।
माँ संतति का अनहित भी कर सकती है।
जब कैकेई के शीश मंथरा करे असर।।
दसरथ एक चक्रवर्ती सम्राट रहे।
कैसे निगला पुत्र-मोह जैसा अजगर।।
गुरु वशिष्ठ या विश्वामित्र, सुमंत तथा।
मंत्रीगण क्या होंठ सिले उस अवसर पर।।
भरत शत्रुघन उसी समय ननिहाल गए।
प्रश्न आज तक चर्चा में हो रहा मुखर।।