सौ हाइकु
हाइकु
1.
नीला आकाश,
पंछी पंख पसारे,
उड़ते सपनों संग।
2.
गंगा की धारा,
मन को छूती लहरें,
शांति का संदेश।
3.
बरसात आती,
धरती नाच उठती,
हरियाली छाए।
4.
सूरज की किरन,
अंधियारा चीरती,
आशा जगाती।
5.
पत्तों की सरगम,
हवा संग गाती है,
वन संगीत।
6.
नदी किनारे,
मछलियाँ चमकतीं,
मोती-सी झलक।
7.
रात का चाँद,
शीतल मुस्कान लिए,
मन बहलाए।
8.
धरती की गोद,
बीजों से लहराए,
स्वर्ण धान्य।
9.
पहाड़ी झरना,
चाँदी-सी धाराएँ,
गीत सुनाए।
10.
रेगिस्तान में,
तपती धूप जली,
ओस की चाह।
11.
भोर की बेला,
मोर पंख फैलाए,
नृत्य करे।
12.
पतझर आया,
सूखी पत्तियाँ झरतीं,
जीवन बदले।
13.
पक्षियों की तान,
भोर में गूँज उठी,
मन मुस्काए।
14.
फूलों की गंध,
भँवरे झूम उठे,
प्रेम गीत।
15.
साँझ उतरती,
गोधूलि के रंग,
मन रँग जाए।
16.
शीत की ठंडक,
अग्नि के पास बैठ,
मन गरमाए।
17.
वन की खामोशी,
झींगुर गुनगुनाते,
नींद बुलाएँ।
18.
मिट्टी की खुशबू,
पहली बरसात संग,
सपनों जैसी।
19.
आंधी आई,
पेड़ों की टहनियाँ,
नाचीं बेसुध।
20.
तारों की झिलमिल,
रात का गहना बनी,
नींद सँवारें।
21.
समुद्र लहरें,
गर्जन और शांति,
दो रूप एक।
22.
पर्वत की चोटी,
बर्फ से मुस्कुराए,
नीला गगन।
23.
धान की बालियाँ,
हवा संग झूलतीं,
संगीत रचें।
24.
गोधूलि बेला,
गायों का लौटना,
बच्चे हँसते।
25.
नन्हा अंकुर,
धरती को चीरकर,
जीवन जीता।
26.
सुबह की किरण,
पर्वत पर मुस्काए,
सुनहरी छाँव।
27.
बरगद पुराना,
जड़ें गहरी फैलीं,
इतिहास गाए।
28.
रेत का महल,
लहरें मिटा देतीं,
क्षणभंगुर जीवन।
29.
भँवरा गाता,
फूलों से रस पीकर,
मधुर तान।
30.
साँझ की वेला,
गोधूलि में गाएँ,
गाँव की गली।
31.
कोयल पुकारे,
आम के बग़ीचे में,
मधुर वाणी।
32.
सावन की धुन,
ढोलक-सी गड़गड़ाहट,
आकाश नाचे।
33.
ओस की बूँदें,
पत्तों पर चमकें,
मोती जैसी।
34.
घास की चादर,
धरती पर बिछी है,
नरमी बाँटे।
35.
शरद की रात,
कमलिनी खिले हैं,
चाँद मुस्काए।
36.
राहों पर बिखरे,
सूखे पीले पत्ते,
शांत सफ़र।
37.
तालाब के जल,
कमल से सुशोभित,
मछली नाचे।
38.
बिजली की चमक,
अंधकार को चीरती,
भय भी सुंदर।
39.
गर्म लू चले,
रेगिस्तान तपेगा,
धैर्य सिखाए।
40.
सर्दी की धूप,
खेतों में सोना-सी,
मन हरषाए।
41.
पलाश खिले हैं,
वन अग्नि बन गया,
लाल ज्वाला।
42.
पंछी का घोंसला,
टहनी पर झूलता,
घर की तरह।
43.
कृषक का पसीना,
धरती पर झरता,
धान उगाए।
44.
बादल घिरे हैं,
मन भीग-सा जाए,
आशा बरसे।
45.
झरनों की रुनझुन,
शंख जैसी ध्वनि,
मन मोहे।
46.
नीम की छाया,
थका यात्री रुका है,
शांति मिली।
47.
तितली उड़ती,
रंगों के पर फैले,
स्वप्न सजाए।
48.
भोर की पूजा,
मंदिर में गूँज रही,
घंटा ध्वनि।
49.
गोधूलि तारा,
आसमान चमकेगा,
मन आलोकित।
50.
धरती की कोख,
बीजों को पालती,
जीवन धारा।
51.
माँ की ममता,
आँचल में समाया,
सारा आकाश।
52.
पिता का चेहरा,
धूप-सी तपिश लिए,
साया ठंडा।
53.
नन्हा खिलौना,
बच्चे के हाथों में,
दुनिया हँसती।
54.
दादी की बातें,
चाँद तारे गिनतीं,
नींद सुलातीं।
55.
गाँव की चौपाल,
बच्चों की हँसी संग,
जीवन महके।
प्रेम और भावनाएँ
56.
नयन की भाषा,
बिन बोले समझे,
प्रेम गहरा।
57.
रात का चाँद,
प्रेमियों की साक्षी,
गवाही देता।
58.
मिलन की बेला,
फूलों की महक सी,
मन बहकाए।
59.
बिछड़ने का क्षण,
आँखों में ठहरा,
सागर जैसा।
60.
पत्रों की महक,
स्याही में घुलती,
दिल की धड़कन।
संघर्ष और श्रम
61.
किसान का हल,
धरती को चीरता,
जीवन बोता।
62.
मजदूर पसीना,
ईंटों पर बहता,
घर सजाता।
63.
रास्ते लंबे,
पथिक चलता जाए,
सपनों संग।
64.
काँटों की राह,
फिर भी मुस्कराए,
जीवन योद्धा।
65.
घड़ी की सुई,
भागते इंसानों-सी,
नाच रही।
आशा और निराशा
66.
अँधेरे के बीच,
दीपक टिमटिमाया,
मन जगाया।
67.
आसमान टूटा,
फिर भी उम्मीदों के,
तारे चमके।
68.
आँसुओं की धारा,
दर्द धो ले जाती,
मन हल्का।
69.
आशा की डोर,
पतंग-सी उड़ती,
मन सँभाले।
70.
खाली कटोरा,
फिर भी विश्वास से,
हाथ उठे।
समय और स्मृति
71.
पुरानी गली,
बचपन की पदचाप,
गूँज रही।
72.
फोटो एलबम,
पीली पन्नों पर,
हँसी ठहरी।
73.
पल बीत गए,
घड़ी ने कह डाला,
यात्रा शेष।
74.
यादों की धुन,
सुनाई देती है,
मन अकेला।
75.
संध्या ढलते,
बुज़ुर्ग की आँखों में,
जीवन कथा।
समाज और रिश्ते
76.
भीड़ की आवाज़,
अकेला मन रोता,
कौन सुनेगा।
77.
दोस्त की हँसी,
थकान मिटा देती,
जीवन सखा।
78.
रिश्तों की डोर,
कभी कड़ी कभी ढीली,
फिर भी जुड़ी।
79.
बाज़ार गली,
हजारों कदमों की,
धूल उठी।
80.
पड़ोसी की घंटी,
त्योहारों की धुन,
घर महकाए।
जीवन-दर्शन
81.
क्षणभंगुर जीवन,
जैसे झरना बहता,
ठहर न पाए।
82.
धैर्य का दीप,
आंधी में जलता,
पथ दिखाए।
83.
दुख-सुख के मेघ,
बारी-बारी आते,
आकाश जैसे।
84.
सपनों की नाव,
मन के समंदर में,
तैर रही।
85.
जीवन संग्राम,
हारे बिना चलता,
सच्चा वीर।
मृत्यु और मुक्ति
86.
चिता की लौ,
धूल में मिल जाता,
सारा अहंकार।
87.
शांति की नींद,
बुज़ुर्ग सो गए,
तारे जगाए।
88.
शव यात्रा धीमी,
घंटी की गूँज में,
जीवन मौन।
89.
फूलों की माला,
मृत्यु को सजाती,
क्षणिक शोभा।
90.
आत्मा का दीप,
शरीर से निकला,
मुक्ति पाई।
आशावाद और पुनर्जन्म
91.
कली मुस्काई,
पिछली रात रोई थी,
नई सुबह।
92.
टूटे सपनों में,
नया बीज अंकुरे,
जीवन जीता।
93.
मिट्टी के भीतर,
बीज सोया चुपचाप,
फिर जग जाएगा।
94.
भोर की धूप,
अंधियारा मिटाती,
जीवन जगमग।
95.
सागर की लहर,
टूटकर भी उठती,
फिर से हँसती।
96.
भ्रमर लौटेगा,
पतझड़ के बाद भी,
फूल खिलेंगे।
97.
घाव भरते हैं,
समय का मरहम ही,
सबको चंगे।
98.
नई पीढ़ियाँ,
पुरानी जड़ों से,
फलती-फूलतीं।
99.
धरती कहती,
सपनों का बोओ बीज,
कल सुनहरा।
100.
मन के दीपक,
हर युग जलते रहेंगे,
अमर आशा।
©Aman Kumar Holy