स्वप्न
कुछ स्वप्नों को तुम देख देख
देते जो मन से फेक फेक
उस स्वप्न में तुमने जो देखा
आंखों में रखो सेंक सेंक
देखा उन वीर जवानों को
देखा ध्वज के अभिमानों को
ज्योतिषी शास्त्र विज्ञानों को
भारत के राज घरानों को
क्या देखा तुमने स्वप्न में अपने
वीरों के बलिदानों को
हां देखा होगा स्वप्न में तुमने
उन रक्तों के दानों को
न देखा हो तो देख लो जाके
बहनों के अरमानों को
हां देख लो जाकर सपनों में
मां-बाप की उन संतानों को
हां देखो जाकर तुम खूनों में
रंगी ही उन म्यानों को
और देख लो जाकर उन सभी
माटी स्वरूप शमशानों को
हां देखो जाके उन वीरों को
फांसी पर जो झूल गए
इस देश की माटी के खातिर
अपनों को तक तो भूल गए
यदि ना देखा तो स्वप्न वो देखो
कांपे रूह जिससे थर थर
और देखो स्वप्नों में जो कभी न
लौट सके अपने घर पर
क्यों न होके भी सैनिक मैं
यह बात बताने आया हूं
यह देश धर्म है सबका क्यों
वह धर्म जताने आया हूं
ज़रा याद करो इसकी महिमा
जिसकी गाथा जग गाता था
यह भारत वही तो भारत है
जो विश्व गुरु कहलाता था
क्या भूल गए इसके गौरव को
तुम सेनानी याद करो
यह समय है कुछ कर जाने का
इस समय को न बर्बाद करो
और, ये कदम बराबर चलते जो
इस चाल को न रुकने दूंगा
एक मामूली सा कवि हूं मैं
पर देश को न झुकने दूंगा |
इस देश को न झुकने दूंगा ||
-पार्थसार्थीशुकला