ब्राह्मण
ब्राह्मण हूं मैं हूं पार्थ शुक्ल
एक बात तुम्हें बतलाता हूं
ना हूं क्षत्रीय न शूद्र वैश्य
क्यों ब्राह्मण मैं कहलाता हूं
कि धर्म है यह वह सर्व पूज्य
जिसको ब्राह्मण है नाम दिया
और धर्म है यह वह सर्वशिष्ठ
जिसको शिक्षण का काम दिया
धरती पर देव है कहलाते
कहलाते हैं सर्वज्ञ यही
है सर्वों मैं ये विद्वान
करते हैं हर एक यज्ञ यही
और धर्म है यह लंकेश्वर का
जिसने लंका पर राज किया
और धर्म है यह कौटिल्य का
जिसने अवध साम्राज्य दिया
अरे राम- कृष्ण के गुरुओं का
वह धर्म यही कहलाता है
और लड़ने में भी सक्षम
परशु से ये रक्त बहाता है
अरे बात करते तुम समता की
यह धर्म स्वयं उस ब्रह्म का है
संपन्न हो तुम यह दिखलाते
अंतर तो केवल कर्म का है
अरे धर्म है यह उसे परशुराम का
जो कुल का संघार करें
और धर्म है यह उस वेदव्यास का
जो गीता का सार लिखे
अब जान लो यह तुम जान लो सब
जो ज्ञान की नदी बहाता है
जिसके सम्मुख सब झुकते हैं
वो ही ब्राह्मण कहलाता है
-पार्थ सारथी शुक्ल