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31 Aug 2025 · 1 min read

कुदरत का फेर

छोड़ दो साथ इन झूठ बोलने वालों का ,
तोड़ दो ग़ुरूर इन फ़रेबी इरादे वालों का ,

जिनका ईमान दौलत की खातिर बिक चुका है
जिनका ज़मीर खुदगर्ज़ी में दफ़्न हो चुका है ,

शर्मसार है ‘अवाम जिनके काले कारनामों से ,
वो दुहाई देते है ईमानदारी की अपने नारों से ,

कब तक ‘अवाम को ये झूठे दिलासे देते रहेंगे ,
जिस दिन इनके चेहरे पर पड़े ये नक़ाब उतरेंगे ,
उसे दिन ये खुद से नफरत करने को मजबूर होंगे ,

वक़्त की मार जब पड़ती है ,
तब दौलत और रसूख़ की नहीं चलती है ,

कुदरत तो अपना खेल दिखा ही जाती है ,
ज़िल्लत तब जो उठानी पड़ती है ,
मांगे मर्ज़ी तो मौत भी नहीं मिलती है।

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