वीर सपूत
नमन है उन वीर सपूतों को,
जो सिर पर कफ़न उठाये थे।
स्वतंत्रता की थामे मशाल,
और सीने पर गोली खाये थे।।
फूंक बिगुल आजादी का,
देशभक्ति की अलख जगाई थी।
आहुति दी स्वातंत्र्य समर में,
आज़ाद सुबह तब आई थी।।
धन्य धरा के शौर्य पुंज,
शत बार तुम्हारा वन्दन है।
ऋणी रहेगी ये मातृभूमि,
असंख्य बार अभिनन्दन है।।
अहिंसा का वो अचूक अस्त्र,
गाँधीजी ने अपनाया था।
वन्दे मातरम के उद्घोष से,
तब ब्रिटिश राज थर्राया था।।
अंग्रेज़ी शासन का कुचक्र,
गर्जना सुभाष से हारा था।
हिल उठी नींव गुलामी की,
जय हिंद हमारा नारा था।।
श्रद्धा पुष्प उन्हें अर्पित,
जो आज़ादी देकर चले गये।
भारत माँ की रक्षा करना,
ये मंत्र सिखाकर चले गये।।
वीर सपूतों की गौरव गाथा,
जब जब गायी जाएगी।
वीरों के शोणित से पुष्पित,
ये मही सदा मुस्कायेगी।।
#स्वरचित व मौलिक रचना
#डॉ.राम नरेश त्रिपाठी ‘ मयूर’